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बॉन्ड्स

स्टेबिलिटी में निवेश करें, सुनिश्चित रिटर्न पाएं, और बॉन्ड्स के साथ अपना भविष्य सुरक्षित बनाएं। एक ख़ुशहाल कल के लिए आज ही निवेश करें!

पर आखिरी बार अपडेट किया गया: 14 अप्रैल, 2026

बॉन्ड एक वित्तीय साधन है, जो फिक्स्ड इनकम प्रदान करता है, जिससे आपको भविष्य के लिए अपनी वित्तीय स्थिति को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। सरल शब्दों में, इस डेब्ट सुरक्षा को उधारकर्ता और लोनदाता के बीच डेब्ट की लिखित एक्नॉलेजमेंट माना जा सकता है।

भारत में बॉन्ड मार्केट एक लोकप्रिय और बढ़ता हुआ बाज़ार है, जिससे निवेशकों को अपने आइडल फ़ंड/सेविंग से फिक्स्ड इनकम जनरेट करने का मौका मिलता है। हालाँकि, भारत में बॉन्ड में निवेश करने से पहले, आपको अच्छी तरह से पता होना चाहिए कि बॉन्ड क्या होते हैं, इसकी विशेषताएं, लाभ, प्रकार, और बहुत कुछ पता होना चाहिए।

भारत में बॉन्ड में निवेश करने और उनका असल में क्या मतलब है, इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए आगे पढ़ें।

बॉन्ड क्या होते हैं?

कुछ कंपनियां, निगम या सरकारें भारत में बॉन्ड उपलब्ध कराती हैं, यानी, जब उन्हें अपनी पूंजी की ज़रूरतों के लिए फ़ंडिंग की ज़रूरत होती है, तब उन्हें जारी किया जाता है। बॉन्ड खरीदने पर, आप एक निर्धारित अवधि के लिए एंटिटी को एक निश्चित राशि (अंकित मूल्य) का भुगतान करते हैं। वे आपको मूलधन (अंकित मूल्य) के साथ अवधि के आखिर तक ब्याज़ देंगे। तकनीकी शब्दों में, बॉन्ड डेब्ट इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिससे आपको इसकी अवधि तक एक फिक्स्ड इनकम मिलती है। कॉर्पोरेट, सरकारें, और दूसरी सॉवरेन संस्थाएं फ़ंड जुटाने के लिए ये इंस्ट्रूमेंट जारी कर सकती हैं।

यह देखते हुए कि यह एक डेब्ट इंस्ट्रूमेंट है, आप अन्य टूल्स की तरह बॉन्ड में ट्रेड कर सकते हैं। आपके लिए ट्रेड करने या निवेश करने के लिए भारत में कई बॉन्ड निवेश प्लेटफॉर्म हैं। इसके अलावा, इक्विटी मार्केट की तुलना में बॉन्ड मार्केट कम अस्थिर है, जिससे यह स्टॉक की तुलना में अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला साधन बन जाता है।

बॉन्ड की विशेषताएं

बॉन्ड की कुछ ज़रूरी विशेषताएं यहां दी गई हैंः

  • डेब्ट इंस्ट्रूमेंट एक निश्चित अवधि (टेन्योर) के लिए फिक्स्ड इनकम प्रदान करते हैं

  • बॉन्ड पर ब्याज दरें फिक्स्ड या फ्लोटिंग हो सकती हैं, जो जारीकर्ता संस्था पर निर्भर करती हैं

  • बॉन्ड पर क्रेडिट रेटिंग होती हैं, जिससे जारीकर्ता की क्रेडिट योग्यता के बारे में पता चलता है।

  • दिवालिया होने की स्थिति में, बॉन्डहोल्डर्स को स्टॉकहोल्डर्स से पहले डेब्ट का भुगतान मिलता है

  • बॉन्ड पर निश्चित मैच्योरिटी डेट होती है, जिसके बाद जारीकर्ता मूल राशि का भुगतान करता है

  • बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव कम होता है और इससे आप अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं

बॉन्ड के विभिन्न प्रकार

भारत में बॉन्ड की एक बड़ी लिस्ट है, जिनमें से कुछ में शामिल हैंः

जब कॉर्पोरेट संस्थाएं, सार्वजनिक या निजी, बॉन्ड जारी करती हैं, तो उन्हें कॉर्पोरेट बॉन्ड कहा जाता है। आम तौर पर उनकी ब्याज़ दरें ऊंची होती हैं और आम तौर पर मध्यम से लंबी अवधि के लिए होती हैं।

जैसा कि नाम से पता चलता है, आप निर्दिष्ट समय पर अपने बॉन्ड को जारी करने वाली संस्था की इक्विटी (शेयर) में बदल सकते हैं।

इनमें ब्याज के तौर पर रिटर्न नहीं मिलते है। इसके बजाय, रिटर्न आपके मूल राशि (फेस वैल्यू) और रिडेम्पशन वैल्यू के बीच का अंतर होता है।

इनमें कोई निश्चित अवधि नहीं होती, और इस कारण आपको मूल राशि नहीं मिलेगी। हालाँकि, जारीकर्ता आपको सदैव ब्याज का भुगतान करेगा।

ये बॉन्ड विशेष रूप से जलवायु विशिष्ट बॉन्ड का सपोर्ट करने के लिए हैं, और इसलिए, जुटाए गए फंड को उन परियोजनाओं में लगाया जाता है जिनका पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी किए गए, इनसे मिलने वाले रिटर्न पर टैक्सेशन की छूट मिलती है।

सार्वजनिक क्षेत्र के अंडरटेकिंग बॉन्ड, जिन्हें आमतौर पर पी.एस.यू बॉन्ड के नाम से जाना जाता है, उन कॉर्पोरेशन द्वारा जारी किए जाते हैं जहाँ सरकार के पास 51% से अधिक शेयर हैं।

राज्य या केंद्र सरकार द्वारा जारी बॉन्ड के लिए एक अम्ब्रेला टर्म। इस तरह, इनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।

बॉन्ड निवेश के फायदे और नुकसान

बॉन्ड के कई फायदे हैं, लेकिन उनमें कुछ कमियां भी हैं। यहां कुछ फायदे और नुकसान दिए गए हैं जिन्हें आपको जानना चाहिए।

फायदे

  • कम जोखिम के साथ मैच्योरिटी तक फिक्स्ड ब्याज़ इनकम

  • फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में हाई लिक्विडिटी क्योंकि उन्हें सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है

  • सरकार या कोलैटरल सपोर्ट के कारण बढ़ी हुई सुरक्षा

नुक्सान

  • अगर महंगाई दर कूपन दर से ज़्यादा हो, तो अवमूल्यन का जोखिम

  • कुछ डेब्ट और इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में कम रिटर्न

  • कम ख़रीदारों और विक्रेताओं के साथ मार्किट में कमी होने के कारण अगर निवेशक जल्दी बॉन्ड नहीं बेच पाते हैं, तो लिक्विडिटी का जोखिम होता है।

  • बॉन्ड में क्रेडिट जोखिम भी होता है जिसका मतलब है कि नुकसान की संभावना है जो जारीकर्ता की भुगतान करने में असमर्थता के कारण उत्पन्न हो सकती है।

बॉन्ड में निवेश करते समय ध्यान देने योग्य बातें

इससे पहले कि आप भारत में बॉन्ड ख़रीदने के लिए ढेर सारे बॉन्ड में से चुनें, सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए इन बातों पर विचार करें।

  • अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्य का आकलन करें, बॉन्ड कम जोखिम और फिक्स्ड इनकम लक्ष्यों के लिए आदर्श हैं

  • अपनी ज़रूरतों के हिसाब से रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए इंट्रेस्ट पे-आउट (फिक्स्ड या फ्लोटिंग) जांचे

  • यह जानने के लिए कि डिफ़ॉल्ट के मामले में क्या होगा, मूल्यांकन करें कि यह सुरक्षित है या असुरक्षित है

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप अपने रिटर्न को अधिकतम कर सकें, टर्म और लिक्विडिटी पर विचार करें

समझदारी से निवेश करना याद रखें। अपने निवेश से ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए उपरोक्त कारकों पर विचार करें। इसके अलावा, अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाना सुनिश्चित करें।

आप प्राइमरी मार्केट या सेकेंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीद सकते हैं। प्राइमरी मार्केट में, बॉन्ड सीधे जारीकर्ता एंटिटी (कॉर्पोरेट, सरकार, आदि) से उपलब्ध होते हैं। सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड, हालांकि, वे हैं जो पहले से ही किसी अन्य निवेशक द्वारा खरीदे गए हैं, जो अब उन्हें बेच रहे हैं।

सरल शब्दों में, सेकेंडरी बॉन्ड मार्केट वह है जहां जारी करने वाली संस्था की कोई भूमिका नहीं होती है। केवल निवेशक/व्यापारी ही इन इंस्ट्रूमेंट्स को खरीदते या बेचते हैं। हालांकि, भारत में सेकेंडरी बॉन्ड मार्केट विकसित हो रहा है।

ऐसा करने से आप जोखिम को कम कर सकते हैं और अपने इन्वेस्टमेंटस की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। बजाज मार्केट्स पर आप भारत में निवेश करने के लिए कुछ टॉप बॉन्ड सहित कई विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेस से, आप तुरंत अपने फाइनेंस को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

Disclaimer:

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फाइनेंशियल कंटेंट स्पेशलिस्ट

समीक्षक

पोशिता भट्ट

बॉन्ड पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बॉन्ड से आपका क्या मतलब है?

बॉन्ड फ़िक्स्ड-आय जनरेट करने वाले इंस्ट्रूमेंट होते हैं। कंपनियां और कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाएं आम तौर पर लंबी अवधि की पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बॉन्ड जारी करती हैं। जब आप भारत में बॉन्ड ख़रीदते हैं, तो आप अपने फ़ंड बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी को ऑफ़र करते हैं। इसके बाद कंपनी आपको बॉन्ड की अवधि समाप्त होने तक आपके निवेश पर ब्याज़ देती है। मैच्योरिटी के बाद, आपको अपनी मूल राशि वापस मिल जाएगी।

भारत में बॉन्ड की व्यवहार्यता आपकी वित्तीय ज़रूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करती है। अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करते रह सकते हैं और लंबे समय के लिए एक फिक्स्ड इनकम चाहते हैं, तो आप बॉन्ड पर विचार कर सकते हैं।

भारत में बॉन्ड मार्केट में निवेश उन निवेशकों के लिए आदर्श है, जो फिक्स्ड आवधिक इनकम चाहते हैं और एक निश्चित अवधि के लिए निवेश में बने रह सकते हैं। चूंकि बॉन्ड मार्केट विकसित हो रहा है, इसलिए अवधि चुनने का विकल्प है। निवेशक छोटी और मध्यम अवधि के लिए भी अपने फ़ंड को बॉन्ड में लगाना चुन सकते हैं।

हाँ, आप बॉन्ड में ऑनलाइन निवेश कर सकते हैं। आप बजाज मार्केट्स पर जा सकते हैं और अपनी पसंद के बॉन्ड में आसानी से और डिजिटल रूप से इन्वेस्ट कर सकते हैं।

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